मध्यप्रदेश में जून महीने की कम बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। मौसम विज्ञान केंद्र के आंकड़ों के अनुसार, 1 जून से 29 जून 2026 के बीच प्रदेश में सामान्य से 39% कम बारिश दर्ज की गई है। पूर्वी मध्यप्रदेश की स्थिति सबसे चिंताजनक है, जहाँ औसत से 68% कम पानी गिरा है। वहीं, पश्चिमी मध्यप्रदेश में यह कमी 11% रही है। राज्य में सामान्यतः 124.2 मिमी बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन मात्र 75.7 मिमी बारिश ही दर्ज की गई है।
⚠️ अगले 24 घंटों का अलर्ट: 5 जिलों में मूसलाधार बारिश
मौसम विभाग ने प्रदेश के सभी 55 जिलों के लिए अलर्ट जारी किया है। बैतूल, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी और बालाघाट में अगले 24 घंटों के भीतर 4 इंच तक मूसलाधार बारिश होने का अनुमान है। इन क्षेत्रों में नागरिकों को आकाशीय बिजली और भारी बारिश के दौरान सुरक्षित रहने की सलाह दी गई है।
💨 50 जिलों में आंधी-तूफान की चेतावनी
भारी बारिश वाले जिलों के अलावा, प्रदेश के शेष 50 जिलों में भी मौसम बिगड़ने की चेतावनी है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, उज्जैन, ग्वालियर, रीवा और सागर संभाग के इलाकों में 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। ग्वालियर, भिंड, मुरैना और नीमच-मंदसौर में भी मौसम में बदलाव देखने को मिलेगा।
⛈️ 2 जुलाई से सक्रिय होगा नया सिस्टम, मिलेगी बड़ी राहत
मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा के अनुसार, 2 जुलाई 2026 से उत्तर-पश्चिम भारत में एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है। इसके साथ ही अरब सागर से आ रही नमी के कारण मध्यप्रदेश में बारिश का एक नया और शक्तिशाली दौर शुरू होगा। 2 और 3 जुलाई को नर्मदापुरम, डिंडौरी, बालाघाट, रायसेन और छिंदवाड़ा जैसे जिलों में ‘अति भारी बारिश’ होने की प्रबल संभावना है, जिससे तापमान में भारी गिरावट आएगी और सूखे खेतों को बड़ी राहत मिलेगी।
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