मध्य प्रदेश के दतिया जिले में ऑनलाइन ठगी का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। आस्था के केंद्र ‘मां पीतांबरा पीठ’ के नाम का दुरुपयोग कर एक शातिर जालसाज ने फर्जी वेबसाइट और मोबाइल ऐप के जरिए देश-विदेश के श्रद्धालुओं को अपना निशाना बनाया। आरोपी ने ‘मिर्च हवन’ और अन्य विशेष अनुष्ठानों का झांसा देकर श्रद्धालुओं से लाखों रुपये की ऑनलाइन ठगी की। दतिया साइबर सेल और कोतवाली पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी सुधीर शर्मा को आगर-मालवा से गिरफ्तार कर लिया है।
🕸️ कैसे बिछाया गया ठगी का जाल?
मंदिर प्रबंधन (पीतांबरा ट्रस्ट) के व्यवस्थापक महेश दुबे को जब पता चला कि उनकी तस्वीर और मंदिर की पहचान का दुरुपयोग किया जा रहा है, तब उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। आरोपी ने एक ऐसी फर्जी वेबसाइट बनाई थी, जिस पर ‘मिर्च हवन’ जैसे अनुष्ठान कराने का दावा किया गया था, जबकि मंदिर प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि पीठ में ऐसा कोई अनुष्ठान नहीं होता है। आरोपी श्रद्धालुओं को धार्मिक लाभ का प्रलोभन देकर ऑनलाइन भुगतान करवाता था।
🔍 पुलिस का एक्शन और जांच का दायरा
कोतवाली थाना प्रभारी धीरेंद्र मिश्रा ने बताया कि आरोपी सुधीर शर्मा के बैंक खातों में लाखों रुपये के लेनदेन के साक्ष्य मिले हैं। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहाँ से उसे दो दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। पुलिस अब उसके मोबाइल, लैपटॉप और अन्य डिजिटल डेटा को खंगाल रही है ताकि इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य सहयोगियों का पता लगाया जा सके।
⚠️ श्रद्धालुओं के लिए मंदिर प्रबंधन की अपील
इस घटना के बाद मां पीतांबरा पीठ प्रबंधन ने सभी भक्तों से सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की पूजा, अनुष्ठान या दान के लिए केवल अधिकृत वेबसाइट और माध्यमों का ही उपयोग करें। किसी भी संदिग्ध वेबसाइट, मोबाइल ऐप या सोशल मीडिया पर दिखने वाले विज्ञापनों के झांसे में न आएं और अपनी निजी जानकारी किसी को साझा न करें।
संपादकीय टिप्पणी: साइबर ठग अब आस्था और श्रद्धा को भी अपना हथियार बनाने से नहीं चूक रहे हैं। क्या आपको लगता है कि बड़े धार्मिक संस्थानों को अपनी ‘आधिकारिक डिजिटल उपस्थिति’ को अधिक स्पष्ट और प्रचारित करना चाहिए ताकि भक्त सुरक्षित रहें? अपने विचार नीचे साझा करें।
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