खंडवा। रीवा में दो दिगंबर जैन आर्यिका माताजी की सड़क दुर्घटना में हुई दर्दनाक मृत्यु के बाद देशभर के जैन समाज में गहरा आक्रोश और चिंता का माहौल है। इसी कड़ी में सोमवार को सकल जैन समाज, खंडवा ने देश के प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, प्रदेश के मुख्यमंत्री, जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक के नाम तहसीलदार महेश सोलंकी व कोतवाली थाना प्रभारी प्रवीण आर्य को ज्ञापन सौंपा। समाज ने ज्ञापन सौंपकर मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराने तथा देशभर में विहार रत संतों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस नीति बनाए जाने की मांग की है।
🔍 घटना को बताया संदेहास्पद, सुरक्षित किए जाएं डिजिटल साक्ष्य
समाज ने ज्ञापन में रीवा में हुई घटना को केवल सामान्य सड़क दुर्घटना मानने से इनकार करते हुए इसे संदेहास्पद बताया है। समाज का कहना है कि उपलब्ध तथ्यों और वीडियो फुटेज से घटना को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। 20 मई की सुबह करीब 6:30 बजे रीवा में जैन साध्वियां निहार क्रिया से लौट रही थीं, तभी तेज रफ्तार कार ने आर्यिका श्री श्रुतमति माताजी एवं आर्यिका श्री उपशममति माताजी को टक्कर मार दी। हादसे के बाद चालक मौके से फरार हो गया और गंभीर रूप से घायल दोनों साध्वियों का बाद में समाधि मरण हो गया। समाज ने मांग की है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल (SIT) या न्यायिक स्तर पर इसकी जांच कराई जाए और सभी सीसीटीवी फुटेज व डिजिटल साक्ष्य तुरंत सुरक्षित किए जाएं।
🛡️ ‘राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति’ और ‘अति संवेदनशील’ श्रेणी की मांग
समाज के प्रचारक सुनील जैन, प्रेमांशु चौधरी और चंद्रकांत सांड ने बताया कि ज्ञापन में जैन समाज ने संतों की सुरक्षा के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं:
विहार करने वाले साधु-संतों के मार्गों पर पुलिस समन्वय, ट्रैफिक नियंत्रण और संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था की जाए।
केंद्र सरकार से ‘राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति’ लागू करने और पैदल विहार करने वाले संतों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा गाइडलाइन व एसओपी (SOP) तैयार करने की मांग की गई है।
जैन साधु-संत पूर्णतः अहिंसक और निहत्थे होते हैं, इसलिए उनके खिलाफ होने वाले अपराधों को विशेष ‘अति संवेदनशील’ श्रेणी में रखा जाना चाहिए।
प्रशासन और जैन समाज के बीच बेहतर समन्वय के लिए ‘संत सिक्योरिटी कोऑर्डिनेशन सेल’ गठित की जाए।
सुनील जैन ने बताया कि जैन समाज हमेशा से शांति, अहिंसा और कानून व्यवस्था में विश्वास रखने वाला समाज रहा है। उनका उद्देश्य तनाव पैदा करना नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना है। जो संत मानवता को अहिंसा का मार्ग दिखाते हैं, उनकी सुरक्षा शासन और समाज की नैतिक जिम्मेदारी है। घटना के विरोध में सोमवार सुबह 8:00 बजे घंटाघर जैन कीर्ति स्तंभ के पास बड़ी संख्या में पुरुष, महिलाएं और मातृ शक्ति उपस्थित हुईं। हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर शांतिपूर्ण मौन रैली घंटाघर से बॉम्बे बाजार चौराहा, केवलराम पेट्रोल पंप चौराहा होते हुए कंट्रोल रूम पहुंची, जहां ज्ञापन प्रस्तुत किया गया।🚶 मौन रैली निकालकर जताया विरोध, संतों की सुरक्षा है नैतिक जिम्मेदारी
👥 कार्यक्रम में इन गणमान्य नागरिकों और समाजजनों की रही उपस्थिति
इस अवसर पर समाज के अध्यक्ष वीरेंद्र भटयांण, दिलीप पहाड़िया, अभय जैन, संजय जैन, पंकज छाबड़ा, विजय सेठी, नवनीत जैन, नितिन जैन, अशोक पालीवाल, सुनील जैन, सौभाग सांड, चंद्रकांत सांड, संजय पंचोलिया, राजेंद्र छाबड़ा, विजय जैन, विकास बोथरा, प्रेमांशु चौधरी, अविनाश जैन, तरुण जैन, अधिवक्ता प्रेमांशु जैन, माणकचंद जैन, पंकज जैन महल, डॉ. सुभाष, डॉ. नरेंद्र जैन, देवेंद्र सराफ, चिंतामण जैन, अरुण सराफ, रोहित मेहता, मिलन जैन, संदीप जैन, चौथमल जैन, डॉ. शरद जैन, विपुल छाबड़ा, महावीर रावका, मनीष जैन सहित बड़ी संख्या में समाजजन एवं मातृ शक्ति उपस्थित थीं। कार्यक्रम का संचालन पंकज जैन महल और संजय पंचोलिया ने किया एवं ज्ञापन का वाचन अध्यक्ष वीरेंद्र जैन ने किया।
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