मुंबई (अनिल बेदाग): भारत में स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ और किफायती बनाने की दिशा में केएचजी (KHG) फाउंडेशन ने एक अहम कदम उठाया है। वर्ष 2025-26 के लिए चार अत्याधुनिक हेल्थ-टेक स्टार्टअप्स का चयन कर फाउंडेशन ने यह संकेत दिया है कि अब उन्नत चिकित्सा तकनीक केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि गांव-गांव तक पहुंचेगी। इस पहल का उद्देश्य सस्ती, गैर-सर्जिकल और जीवनरक्षक स्वास्थ्य सुविधाओं को आम लोगों तक पहुँचाना है।
🔬 डॉ. माशेलकर ने नवाचार को बताया ‘बहुजन हिताय’
इस पहल पर प्रकाश डालते हुए पद्म विभूषण डॉ. आर. ए. माशेलकर ने कहा, “परिवर्तनकारी विज्ञान ‘बहुजन हिताय’ होना चाहिए—कम लागत में अधिक लोगों तक बेहतर सुविधाएं पहुंचाना ही असली नवाचार है।” चयनित स्टार्टअप्स में ‘अगत्स्या सॉफ्टवेयर’ का नॉन-इनवेसिव डिवाइस, ‘रेमेडियो इनोवेटिव सॉल्यूशंस’ की कम लागत वाली ग्लूकोमा डायग्नोस्टिक तकनीक, ‘फास्ट सेंस इनोवेशन’ का तेजी से सेप्सिस पहचानने वाला समाधान और ‘आयु डिवाइसस’ का डिजिटल स्टेथोस्कोप शामिल हैं।
⚙️ गुणवत्ता और कम लागत का बेहतरीन संगम
प्रोफेसर अनिल गुप्ता के अनुसार, ये नवाचार साबित करते हैं कि गुणवत्ता से समझौता किए बिना लागत कम की जा सकती है। केएचजी फाउंडेशन इन स्टार्टअप्स को तकनीकी मार्गदर्शन, पूंजी और नेटवर्किंग समर्थन प्रदान करेगा, जिससे वे अपने विजन को धरातल पर उतार सकें।
🇮🇳 ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘स्वस्थ भारत’ के विजन को मजबूती
यह पहल ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘स्वस्थ भारत’ के विजन को मजबूत करते हुए देश में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को नई ऊंचाई देने का संकेत देती है। यह न केवल भारतीय चिकित्सा क्षेत्र में क्रांति लाएगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी किफायती स्वास्थ्य तकनीक का उदाहरण पेश करेगी।
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