खंडवा। निमाड़ एवं मालवा के रेडियो श्रोताओं द्वारा आकाशवाणी इंदौर का स्थापना दिवस बड़ी धूमधाम से मनाया गया। 22 मई सन् 1955 को आकाशवाणी इंदौर की शुरुआत हुई थी। सर्वप्रथम आजाद नगर इंदौर में 20 किलोवाट का ट्रांसमीटर लगा, जिससे आकाशवाणी इंदौर की शुरुआत हुई। उसके पश्चात राऊ में 200 किलोवाट का डिजिटल ट्रांसमीटर लगने से बहुत बड़े क्षेत्र में आकाशवाणी इंदौर सुनाई देने लगा। बड़वाह के रेडियो श्रोता प्रवीण श्रीमाली ने बताया कि मालवा-निमाड़ का सर्वप्रथम आकाशवाणी केंद्र इंदौर ही रहा है। चाहे शिक्षा का क्षेत्र हो या विज्ञान एवं साहित्य से जुड़ी बातें; सांस्कृतिक, राजनीतिक एवं व्यावसायिक रूप से आकाशवाणी इंदौर ने जहां एक ओर विविध भारती के माध्यम से मनोरंजन की दुनिया में अपनी छाप छोड़ी, वहीं अन्य गतिविधियों के जरिए भी जन-जन तक अपनी आवाज को पहुंचाया।
💐 रेडियो श्रोताओं ने दी शुभकामनाएं, याद किया स्वर्णिम सफर
रेडियो श्रोता आनंद जोशी ने बताया कि निमाड़-मालवा के रेडियो श्रोताओं में सर्वश्री श्रवण सिंह गिन्नारे, संजय पंचोलिया, विजय महोबिया, सुदर्शन शाह, दुर्गा प्रसाद सैनी, ठाकुर भवानी सिंह बेस, मोहम्मद रफीक पवार, अब्दुल गफ्फार डाबर, पिंटू सेन, हुकुमचंद कटारिया, शेख मूसा मोहसिन, बाबूलाल चौधरी, विजय सोनी एवं कपिल तिवारी आदि ने आकाशवाणी परिवार को शुभकामनाएं दीं।
🎭 सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम, ‘मैं हूं आकाशवाणी’ नाटक का हुआ मंचन
औपचारिक सत्र के बाद आकाशवाणी के विभिन्न विंग्स और कलाकारों द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किए गए, जिसने समां बांध दिया। लोक गायन में स्वाति उखले और साथियों द्वारा सुमधुर लोक गीतों की प्रस्तुति दी गई। आकस्मिक उद्घोषकों द्वारा आकाशवाणी के सफर और उसकी महत्ता को दर्शाता विशेष नाटक ‘मैं हूं आकाशवाणी’ का प्रभावी मंचन किया गया। ब्रॉडकास्ट असिस्टेंट और खेती-गृहस्थी के कम्पीयर्स द्वारा गुदगुदाने वाली हास्य झलकियां पेश की गईं। महिला सभा की कम्पीयर्स द्वारा सखियों की मस्ती और युवा वाणी व मराठी कम्पीयर्स द्वारा ऊर्जा से भरपूर प्रस्तुतियां दी गईं। कार्यक्रम के अंत में पूरा आकाशवाणी परिवार एक साथ ढोल की थाप पर थिरक उठा।
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