बिलासपुर: कोनी स्थित 220 बिस्तरों वाले सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पूर्व ग्रामीण कांग्रेस अध्यक्ष विजय केशरवानी ने आरोप लगाया है कि करोड़ों की लागत से तैयार इस अत्याधुनिक अस्पताल के लोकार्पण और मुख्यमंत्री के निरीक्षण के बावजूद, यह आज तक अपनी पूरी क्षमता से संचालित नहीं हो पा रहा है।
📉 मरीजों को नहीं मिल रहा अपेक्षित उपचार
कांग्रेस का कहना है कि बिलासपुर संभाग के हजारों गरीब, किसान और मजदूर इस अस्पताल से गंभीर बीमारियों (जैसे हार्ट, किडनी, ब्रेन) के इलाज की उम्मीद लगाए बैठे थे। लेकिन आज स्थिति यह है कि गंभीर मरीजों को यहाँ इलाज मिलने के बजाय सिम्स (CIMS) या अन्य बड़े अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता है। यह अस्पताल सिर्फ एक रेफर सेंटर बनकर रह गया है।
📋 कांग्रेस द्वारा गिनाई गई मुख्य खामियां
कांग्रेस ने अस्पताल में व्याप्त बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर कई सवाल उठाए हैं:
इमरजेंसी सेवाएं: 24 घंटे आपातकालीन सेवाओं का अभाव।
तकनीकी सुविधाएं: ऑक्सीजन प्लांट और कैथ लैब अभी तक चालू नहीं।
स्टाफ की कमी: पर्याप्त विशेषज्ञ डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और तकनीकी कर्मचारियों की भारी कमी।
परिवहन: पूर्ण सुविधायुक्त एंबुलेंस का अभाव।
विजय केशरवानी ने मांग की है कि इस अस्पताल का नाम दिवंगत वरिष्ठ नेता दिलीप सिंह जूदेव के नाम पर है, अतः उनके नाम की गरिमा बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने अस्पताल के पूर्ण संचालन और तत्काल उपकरणों की स्थापना की मांग की है। साथ ही, कांग्रेस ने बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला से भी अपील की है कि यदि भविष्य में अस्पताल के निजीकरण की कोई भी कोशिश होती है, तो वे स्पष्ट रूप से जनता के हित में अपना रुख रखें।⚖️ ‘नाम की गरिमा और जिम्मेदारी’
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