खंडवा। मध्यप्रदेश के खंडवा जिले के हरसूद क्षेत्र से जुड़ी यह कहानी सिर्फ दो भाइयों की सफलता नहीं, बल्कि संघर्ष, धैर्य और मेहनत की एक ऐसी मिसाल है, जो हर किसी को प्रेरित करती है। समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि रितेश गोयल और योगेश गोयल, जिनका बचपन और जीवन का शुरुआती दौर आर्थिक तंगी और मुश्किल हालातों में बीता, आज निमाड़ के बड़े उद्योगपति और कॉलोनाइजर के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं।
🌊 हरसूद विस्थापन और जीवन का सबसे कठिन दौर
सुनील जैन ने बताया कि कभी ऐसा समय था जब एशिया का सबसे बड़ा विस्थापन हरसूद नगर एवं आसपास के कई गांवों का हुआ। हरसूद क्षेत्र नर्मदा परियोजना के चलते डूब में आ गया और हजारों परिवारों की तरह इन दोनों भाइयों का भी सब कुछ छूट गया। घर, कारोबार और पहचान—सब पीछे छूट गया और उन्हें मजबूरी में खंडवा आकर नई जिंदगी शुरू करनी पड़ी। यह दौर उनके जीवन का सबसे कठिन समय था, जहां हर दिन एक नई चुनौती लेकर आता था।
🏗️ शून्य से शुरुआत और ‘बालाजी ग्रुप’ का उदय
रितेश गोयल बताते हैं कि उनका पुश्तैनी काम व्यापार का था और हरसूद में उनकी फैक्ट्री और कारोबार स्थापित था। लेकिन विस्थापन के बाद सब कुछ खत्म हो गया। ऐसे में उन्होंने हार मानने के बजाय अपने छोटे भाई योगेश गोयल के साथ मिलकर फिर से शुरुआत करने का फैसला लिया। शुरुआत छोटे स्तर से हुई; मंडी में काम किया, पुराने व्यापार को फिर से खड़ा करने की कोशिश की और धीरे-धीरे नए क्षेत्रों में कदम बढ़ाए। गिट्टी और निर्माण कार्यों में अनुभव हासिल करने के बाद दोनों भाइयों ने कॉलोनी डेवलपमेंट के क्षेत्र में कदम रखा, जो उनके जीवन का ‘टर्निंग पॉइंट’ साबित हुआ। आज निमाड़ क्षेत्र में उनके 14 से 15 बड़े प्रोजेक्ट चल रहे हैं।
🕉️ धर्म और अध्यात्म: 81 फीट की बालाजी प्रतिमा और मंदिर निर्माण
समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि आज उनकी पहचान सिर्फ एक सफल कारोबारी के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे उद्यमी के रूप में है, जिन्होंने सैकड़ों लोगों को रोजगार दिया। व्यवसाय के साथ-साथ उन्होंने समाज और धर्म के क्षेत्र में भी बड़ा योगदान दिया है। छैगांव माखन स्थित दिव्य बालाजी नगर में वे 81 फीट ऊंची भगवान तिरुपति बालाजी की भव्य मूर्ति का निर्माण करवा रहे हैं, जो आने वाले समय में पूरे क्षेत्र का एक प्रमुख धार्मिक और पर्यटन केंद्र बनेगी। साथ ही, ओंकारेश्वर में केदारेश्वर धाम मंदिर निर्माण की योजना भी उनके द्वारा तैयार की जा रही है।
🎓 शिक्षा के क्षेत्र में योगदान: एंजेल प्लेनेट स्कूल
शिक्षा के क्षेत्र में भी उन्होंने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। “एंजेल प्लेनेट स्कूल” के माध्यम से वे बच्चों को बेहतर शिक्षा के साथ-साथ खेल और अन्य गतिविधियों में आगे बढ़ने का अवसर दे रहे हैं। इस स्कूल के कई बच्चों ने जिला और प्रदेश स्तर पर उपलब्धियां हासिल कर खंडवा का नाम रोशन किया है।
🌟 मेहनत और ईमानदारी से बनाई नई पहचान
रितेश गोयल बताते हैं कि जब वे खंडवा आए थे, तब उनके पास बहुत सीमित संसाधन थे। उन्होंने एक छोटा मकान खरीदा और वहीं से अपने नए जीवन की शुरुआत की। आज उनका “बालाजी ग्रुप” निमाड़ क्षेत्र में एक बड़ा नाम बन चुका है। उनकी कॉलोनियों में आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं और उनका कारोबार करोड़ों में पहुंच चुका है। यह कहानी बताती है कि अगर इंसान के पास हिम्मत और कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो वह किसी भी मुश्किल को पार कर सकता है। हरसूद के विस्थापन से लेकर खंडवा में सफलता का यह सफर वास्तव में ‘संघर्ष से शिखर’ तक पहुंचने की कहानी है।
यह खबर आपको कैसी लगी?


खंडवा




























