खंडवा। उप संचालक कृषि नितेश कुमार यादव ने जिले के कृषकों को समझाइश दी है कि खरीफ फसलों की बुवाई से पूर्व गुणवत्तायुक्त बीज का चयन करना अत्यंत आवश्यक है। जिले में खरीफ 2026 हेतु कपास, मक्का, सोयाबीन, अरहर, मूंग, उड़द आदि फसलों का बीज भण्डारण एवं विक्रय का कार्य प्रारम्भ हो चुका है। उन्होंने सलाह दी है कि किसान भाई विश्वसनीय और पंजीकृत दुकानों से ही बीजों की खरीदी करें।
🧾 पंजीकृत दुकानों से ही खरीदें बीज, पक्का बिल लेना है अनिवार्य
किसानों को हिदायत दी गई है कि खरीदे गए बीज का पक्का बिल आवश्यक रूप से लें, जिस पर बीज की किस्म, कंपनी, बैच, लॉट नंबर, बीज उत्पादन तिथि और अंतिम तिथि, दर, व मात्रा स्पष्ट लिखी होनी चाहिए। भविष्य में किसी समस्या की स्थिति में बिल अत्यंत आवश्यक दस्तावेज होता है। किसान कपास बीज के पैकेट पंजीकृत विक्रेताओं से शासन द्वारा निर्धारित दर—कपास बीजी-1 (BG-1) 635 रुपये प्रति पैकेट एवं बीजी-2 (BG-2) 901 रुपये प्रति पैकेट (475 ग्राम)—पर ही क्रय करें।
🌱 बुवाई से पहले करें अंकुरण परीक्षण, सोयाबीन बीज का रखें खास ध्यान
उप संचालक कृषि ने किसानों से अपील की है कि बुवाई से पूर्व बीज के अंकुरण का परीक्षण अवश्य करें तथा प्रमाणित एवं गुणवत्तायुक्त बीज का ही उपयोग करें। कम अंकुरण वाले बीज का उपयोग करने से पौधों की संख्या प्रभावित होती है एवं उत्पादन में कमी आती है। उन्होंने बताया कि सोयाबीन बीज का बाहरी आवरण (सीड कोट) अत्यंत नाजुक होता है। अधिक उठापटक, ऊंचाई से गिराने या बार-बार भराई-खाली करने से बीज क्षतिग्रस्त हो सकता है, जिससे उसका अंकुरण प्रभावित होता है। कृषक भाई यदि ‘ट्रुथफुल लेबल्ड’ (Truthful Labeled) बीज का उपयोग कर रहे हैं, तो उसका स्रोत, उत्पादक संस्था एवं गुणवत्ता संबंधी जानकारी अवश्य प्राप्त करें।
🔬 रोगमुक्ति के लिए बीज उपचार जरूरी, खाद-बीज के लिए जा रहे नमूने
सोयाबीन फसल में अच्छे अंकुरण, प्रारंभिक वृद्धि एवं रोगों से सुरक्षा हेतु बीज उपचार अत्यंत आवश्यक है। उप संचालक कृषि ने बताया कि बीज उपचार करने से बीज एवं मृदा जनित रोगों का प्रकोप कम होता है तथा उत्पादन में वृद्धि होती है। उपचारित बीज को छाया में सुखाकर उसी दिन उसकी बुवाई करें। जैविक कल्चर का उपयोग रासायनिक उपचार के बाद ही करें। जिले के कृषकों को गुणवत्तापूर्ण कृषि सामग्री उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विभाग द्वारा नियमित रूप से कृषि आदानों (खाद-बीज) का निरीक्षण किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अभी तक उर्वरक के 55 तथा बीज के 136 नमूने लेकर गुणवत्ता परीक्षण हेतु प्रयोगशाला भेजे गए हैं। अमानक पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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