खंडवा। मध्य प्रदेश में आगामी दिनों में राज्यसभा के चुनाव होने जा रहे हैं, जिसमें से एक सीट कांग्रेस की सुरक्षित है। इसको लेकर निर्वाचन की प्रक्रिया चल रही है। मध्य प्रदेश की इस एकमात्र सुरक्षित राज्यसभा सीट को लेकर कांग्रेस में कई नाम सामने आ रहे हैं और पार्टी इस पर गहन मंथन कर रही है। कांग्रेस आलाकमान इस बार पिछड़ा वर्ग (OBC) से किसी चेहरे को राज्यसभा में भेजना चाहता है, जिसके लिए वर्तमान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, कमलेश्वर पटेल एवं पूर्व पीसीसी चीफ अरुण यादव का नाम प्रमुख रूप से सामने आ रहा है। अब देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस पार्टी की ओर से राज्यसभा सीट का सेहरा किस नेता के सिर बंधेगा।
💪 निमाड़-मालवा क्षेत्र में अरुण यादव का सियासी दबदबा
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की ओर से राज्यसभा नहीं जाने के फैसले के बाद अब अरुण यादव का नाम सबसे प्रमुखता से उभरकर सामने आ रहा है। निमाड़ के कद्दावर नेता रहे स्वर्गीय सुभाष यादव के सुपुत्र अरुण यादव 2009 की यूपीए (UPA) सरकार में केंद्र में मंत्री रह चुके हैं। साथ ही, कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा उन्हें मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी की जिम्मेदारी दिए जाने के बाद उन्होंने प्रदेश भर में कांग्रेस को मजबूत करने के लिए लगातार जमीनी दौरे किए थे, जिसके परिणामस्वरूप 2018 में कांग्रेस ने सत्ता में वापसी की थी। अरुण यादव एक बड़ा ओबीसी चेहरा होने के साथ-साथ निमाड़-मालवा की करीब तीन दर्जन विधानसभा सीटों पर मजबूत पकड़ रखते हैं। यदि कांग्रेस उन्हें राज्यसभा भेजती है, तो आगामी चुनावों में इस क्षेत्र के सियासी समीकरणों में बड़ा फेरबदल देखने को मिल सकता है।
🔥 भाजपा के कई बड़े दिग्गजों को चुनावी मैदान में हरा चुके हैं अरुण
अरुण यादव का निमाड़-मालवा क्षेत्र में बड़ा राजनीतिक दखल है और समूचे क्षेत्र में उन्हें व्यापक जनसमर्थन हासिल है। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में भाजपा के कई बड़े दिग्गजों को चुनावी शिकस्त दी है। वर्ष 2007 के खरगोन लोकसभा उपचुनाव में उन्होंने भाजपा के वरिष्ठ नेता कृष्णमुरारी मोघे को बड़े अंतर से हराया था, वहीं 2009 के आम चुनाव में खंडवा लोकसभा सीट पर भाजपा के दिग्गज नेता स्वर्गीय नंदकुमार सिंह चौहान को पराजित कर अपनी राजनीतिक ताकत का लोहा मनवाया था।
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