कोलाडिट/खंडवा | धर्म एवं आध्यात्मिक समाचार
खंडवा जिले के ग्राम कोलाडिट में आयोजित संत शिरोमणि सिंगाजी महाराज की भव्य कथा के तृतीय दिवस पर आध्यात्मिक रस की अविरल धारा प्रवाहित हुई। मंडलेश्वर से पधारीं सुप्रसिद्ध कथावाचिका दीदी श्री चेतना भारती ने भावपूर्ण एवं हृदयस्पर्शी शैली में कथा का श्रवण कराकर श्रोताओं को भक्ति-रस से सराबोर कर दिया।
🚩 गुरु के निर्गुण भजनों से जागा वैराग्य, सिंगाजी बने शिष्य
दीदी श्री ने प्रसंग सुनाते हुए कहा कि जब संत सिंगाजी महाराज ने अपने गुरु मनरंग गिरी के मुखारविंद से निर्गुण भजन सुना, तो वे शब्द बाण की भांति उनके हृदय में उतर गए। उसी क्षण सिंगाजी महाराज के भीतर वैराग्य का उदय हुआ और वे गुरु मनरंग स्वामी के चरणों में नतमस्तक हो गए। मनरंग स्वामी ने सिंगाजी महाराज को शिष्य रूप में स्वीकार कर उन्हें आत्मज्ञान के पथ पर अग्रसर किया।
🪷 संसार में रहकर भी जल में कमल की भांति रहे संत सिंगाजी
कथावाचिका ने बताया कि संत सिंगाजी महाराज ने माया का परित्याग मन से किया। बिना संसार और घर-परिवार छोड़े वे जल में खिले कमल की भांति अनासक्त योगी बने रहे। गृहस्थ धर्म में रहते हुए अपनी रहनी और कहनी से उन्होंने जगत को यह अनुपम शिक्षा दी कि मानव जीवन में रहकर भी नर से नारायण बना जा सकता है। संतों की स्थिति का वर्णन करते हुए दीदी श्री ने कहा कि भले ही संत बाजार में खड़े हों, पर उनकी अंतरात्मा हिमालय की गिरी-कंदराओं में ध्यानस्थ योगी के समान स्थिर रहती है। संत की आंतरिक शांति कभी खंडित नहीं होती चाहे परिस्थितियां अनुकूल हों या प्रतिकूल, क्योंकि वे हर अवस्था को दृष्टा भाव से देखते हैं।
🙏 घरों में नित्य आरती और वधावा करने का आह्वान
अंत में दीदी श्री चेतना भारती ने सभी श्रद्धालुओं से निवेदन किया कि वे अपने घरों में नित्य संत सिंगाजी महाराज की आरती एवं वधावा अवश्य करें, जिससे घर-परिवार में सुख, शांति और सद्भाव बना रहे। उल्लेखनीय है कि इस दिव्य कथा का आयोजन ग्रामवासियों के द्वारा किया जा रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होकर धर्मलाभ प्राप्त कर रहे हैं।
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