खंडवा। विगत दिवस ग्वालियर के ग्राम कुलेथ में प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने एक महत्वपूर्ण घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने पट्टे की जमीन वाले लोगों के हित में बड़ा निर्णय लिया है। जिन लोगों के पास पट्टे की जमीन है उन्हें उस जमीन पर लोन भी मिल सकेगा, क्योंकि प्रदेश सरकार पट्टे वाली जमीन की रजिस्ट्री करने जा रही है और रजिस्ट्री पर होने वाला खर्च का रुपया भी प्रदेश सरकार वहन करेगी।
इसी बात को लेकर इंदिरा सागर बांध प्रभावित हरसूद के लोगों ने मुख्यमंत्री को एक पत्र लिखा। जिसमें विस्थापितों ने कहा कि राष्ट्र हित की महती परियोजना इंदिरा सागर बांध में अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले हरसूद वासियों ने ऐसा क्या गुनाह किया है, जिससे उन्हें डूबने के 22 वर्षों बाद भी उनका हक नहीं मिल पा रहा है?
पैसे लेने के बाद भी 22 साल से मालिकाना हक का इंतज़ार…
हरसूद के विस्थापितों ने पत्र के माध्यम से कहा कि एनएचडीसी (NHDC) ने नए हरसूद में आवासीय एवं व्यवसायिक भूखंडों का पूरा पैसा 22 वर्ष पहले ही ले लिया है, परंतु उन व्यावसायिक भूखंडों का मालिकाना हक आज तक प्राप्त नहीं हुआ। दूसरी ओर, एनएचडीसी जैसी जनविरोधी सोच वाली कंपनी ने हरसूद वालों को मामूली मुआवजा देकर वर्षा काल में ही विस्थापित कर दिया था, जबकि वर्षा काल में चिड़िया का घोंसला भी नहीं तोड़ा जाता है।
विस्थापितों की मुख्य मांगें और समस्याएं:
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मालिकाना हक: विस्थापितों ने व्यवसायिक भूखंडों की पूरी कीमत 22 साल पहले चुका दी है, लेकिन हक अभी तक नहीं मिला।
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ऋण सुविधा का अभाव: मालिकाना हक न होने के कारण विस्थापित इन भूखंडों पर बैंक लोन या ऋण सुविधा नहीं ले पा रहे हैं।
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व्यवसाय का संकट: दुकान निर्माण न होने से कई विस्थापित व्यापारी आज भी अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं।
मुख्यमंत्री से अविलंब न्याय की गुहार…
डूब वासियों के साथ हुए अन्याय की पराकाष्ठा देखिए कि पहले उनकी जमीन का कब्जा ले लिया गया और फिर उन्हें मामूली मुआवजा थमा दिया गया। विस्थापित रमेशचंद बंसल, चंद्र कुमार सांड, रणजीत सिंह ठाकुर आदि विस्थापितों ने एक बार फिर मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अविलंब हरसूद वासियों को उनके हक के व्यवसायिक भूखंडों का मालिकाना हक देने की मांग की है।
विस्थापित चंद्र कुमार सांड ने कहा कि सरकार बलिदानी विस्थापितों के लिए व्यवसाय के अवसर प्रदान करें। मालिकाना हक मिलने से छनेरा (नया हरसूद) में व्यवसाय के अवसर बढ़ेंगे और विस्थापित अपनी दुकान का निर्माण कर आत्मनिर्भर हो सकेंगे।
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