खंडवा/पंधाना | अग्नि हादसे की दुखद खबर
जलते घरों की लपटों में सिर्फ दीवारें नहीं जलीं, किसी का आशियाना, किसी की उम्मीदें और किसी की पूरी जिंदगी राख हो गई। खंडवा जिले की पंधाना तहसील के ग्राम जामली खुर्द अंतर्गत खापरी गांव के आदिवासी ‘धनतर फालिया’ में बुधवार को लगी भीषण आग ने छह आदिवासी परिवारों को पूरी तरह उजाड़ दिया।
आग इतनी भयानक थी कि देखते ही देखते छह कच्चे मकान जलकर राख हो गए और गरीब परिवारों की वर्षों की मेहनत पल भर में स्वाहा हो गई। फालिया में चीख-पुकार मची हुई है और पीड़ित परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है। जिन घरों में कभी चूल्हा जलता था, वहां अब सिर्फ राख और मलबा ही बचा है।
✨ सब कुछ जलकर राख: 20 बकरियां जिंदा जलीं, आभूषण भी पिघले
प्रशासनिक पंचनामे और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग में इन आदिवासी परिवारों का पूरा गृहस्थी का सामान, कपड़े, रखा हुआ अनाज और यहां तक कि पहनने के चांदी के आभूषण भी जलकर खाक हो गए।
पशुधन का भारी नुकसान: आग की चपेट में आने से लगभग 20 बकरियां जिंदा जल गईं (बताया जा रहा है कि कई बकरियों की हड्डियां तक नहीं बचीं)।
एक भैंस भी आग में बुरी तरह झुलस गई है, जो फिलहाल घायल अवस्था में है।
ग्राम सरपंच ने बताया कि आग की लपटें बेकाबू होकर घरों के पास लगे खेत तक पहुंचने लगी थीं, जहां गेहूं की गरी (फसल) जमा कर रखी गई थी। अगर आग वहां पहुंच जाती तो नुकसान का आंकड़ा और भी बड़ा हो सकता था। लेकिन ग्रामीणों ने सूझबूझ दिखाते हुए तुरंत ट्रैक्टर से कल्टीवेटर चलाकर गेहूं की गरी के चारों ओर मिट्टी की पट्टी बना दी, जिससे आग आगे नहीं फैल पाई।🚜 ग्रामीणों की सूझबूझ से टला और बड़ा नुकसान
🚒 मौके पर पहुंची दमकल, लेकिन छिन गई छत
सूचना मिलने पर फायर ब्रिगेड की टीम भी मौके पर पहुंची और काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। हालांकि, तब तक छह परिवारों की पूरी गृहस्थी तबाह हो चुकी थी।
हालात इतने हृदयविदारक हैं कि इन बेसहारा परिवारों के सामने अब सबसे बड़ी चिंता सिर छिपाने और दो वक्त की रोटी की है। उनके पास न पहनने को कपड़े बचे हैं, न रहने को घर और न ही खाने के लिए अनाज। अब प्रशासन और समाज के सहयोग की सख्त आवश्यकता है।
यह खबर आपको कैसी लगी?


खंडवा



























