खंडवा। बुधवार को शिवशक्ति महिला मण्डल द्वारा शहर के रामनगर में आयोजित शिव महापुराण कथा के छठवें दिन भक्तों का जनसैलाब उमड़ा। वृंदावन धाम से पधारे पं. श्री बनवारी भाई उपमन्यू जी महाराज ने कथा के दौरान कहा कि भगवान राम ने सदैव अपने कुल की मर्यादा का पालन किया— ‘रघुकुल रीति सदा चलि आई, प्राण जाहि पर वचन न जाई।’
रामजी ने अपने पिता के वचनों का मान रखने के लिए सहर्ष चौदह वर्ष का वनवास स्वीकार किया। इसी प्रकार सीताहरण के बाद जब विभीषण शरण में आए, तब रामजी ने उन्हें लंकेश घोषित कर दिया। इस पर सुग्रीव ने शंका व्यक्त की कि यदि रावण सीता माता को लेकर शरण में आ गया तो क्या होगा? तब रामजी ने उत्तर दिया कि यदि रावण भी शरण में आ गया, तब भी लंका के राजा विभीषण ही होंगे और हम रावण को अयोध्या का राज्य सौंपकर चारों भाई वन में ही वास करेंगे।
महाराज जी ने बताया कि भगवान राम ने शत्रु के समक्ष भी सदैव सत्य और वचन का पालन किया। कथा के दौरान कार्तिकेय द्वारा तारकासुर वध और नंदी जन्म आदि की मनोरम कथाओं का श्रवण भी कराया गया। उल्लेखनीय है कि आज शिवमहापुराण कथा का विश्राम दिवस है।
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