खंडवा। श्री पार्श्वनाथ पोरवाड़ दिगंबर जैन मंदिर सराफा में आगामी 10 जून को भगवान श्री 1008 पार्श्वनाथ के समक्ष 64 चंवर एवं भव्य चंदेवा समर्पण का भव्य आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर पोरवाड़ युवा ओटला मंच, सराफा के तत्वावधान में पूर्ण श्रद्धा एवं भक्ति के साथ ‘पार्श्वनाथ विधान’ का आयोजन भी संपन्न होगा।
✨ प्रतिभास्थली की ब्रह्मचारिणी बहनों ने जरदोजी कला से किया तैयार
पोरवाड़ दिगंबर जैन समाज के मीडिया प्रभारी प्रेमांशु चौधरी ने बताया कि भगवान के समक्ष समर्पित किया जाने वाला यह आकर्षक एवं भव्य चंदेवा जबलपुर स्थित प्रतिभास्थली की ब्रह्मचारिणी बहनों द्वारा तैयार किया गया है। इस चंदेवे पर संपूर्ण जरदोजी कला का उत्कृष्ट कार्य किया गया है, जिसकी सुंदरता देखते ही बनती है। इसे तैयार करने में लगभग दो माह का समय लगा है। पोरवाड़ दिगंबर ट्रस्ट मंडल की सहमति के बाद से इसे बनाने का कार्य शुरू कर दिया गया था।
🌸 समर्पण और आत्मनिर्भरता की अनूठी मिसाल
इस चंदेवा निर्माण में विशेष रूप से विधि दीदी एवं उनकी सहयोगी ब्रह्मचारिणी बहनों ने असीम समर्पण और परिश्रम के साथ कार्य किया है। ज्ञात हो कि प्रतिभास्थली (जबलपुर) में ब्रह्मचारिणी बहनें धार्मिक एवं आध्यात्मिक शिक्षा के साथ-साथ आत्मनिर्भरता की दिशा में भी उल्लेखनीय कार्य कर रही हैं। चल चरखा योजना के अंतर्गत हथकरघा के माध्यम से खादी वस्त्रों तथा अन्य उपयोगी वस्तुओं का निर्माण किया जाता है। इन कार्यों से प्राप्त आय का उपयोग सेवा एवं जरूरतमंदों की सहायता में किया जाता है।
🤝 युवा मंच के सहयोग से पूरा हुआ कार्य, शुक्रवार को हुआ अनावरण
उल्लेखनीय है कि चंदेवा समर्पण का यह संपूर्ण कार्य पोरवाड़ युवा ओटला मंच, सराफा के सदस्यों एवं दानदाताओं के सामूहिक सहयोग एवं सहभागिता से ही संपन्न हुआ है। समाजजनों ने इस धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहल की भरपूर सराहना करते हुए इसे धर्म, सेवा और सामूहिक एकता का एक प्रेरणादायी उदाहरण बताया है। 10 जून को होने वाले इस आयोजन को लेकर जैन समाज में विशेष उत्साह एवं श्रद्धा का वातावरण बना हुआ है। इस चंदेवे का शुक्रवार को श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में विधिवत अनावरण किया गया, जिसके बाद 10 जून को इसे मंदिर जी में स्थापित किया जाएगा।
👑 जानिए क्या है दिगंबर जैन मंदिर में चंदेवा (छत्रत्रय) का महत्व
मीडिया प्रभारी प्रेमांशु चौधरी ने बताया कि दिगंबर जैन मंदिर में भगवान की मूर्ति के ऊपर लगे अलंकृत छत्र या मुकुट को ‘चंदेवा’ (या छत्रत्रय) कहा जाता है। जैन मान्यता के हिसाब से इसका बहुत गहरा महत्व है:
तीन लोकों का प्रतीक: चंदेवा मूलतः तीन छत्रों का समूह होता है, जो जैन धर्म में तीन लोकों (ऊर्ध्वलोक, मध्यलोक और अधोलोक) को दर्शाता है। यह इस बात का प्रतीक है कि भगवान इन तीनों लोकों के स्वामी और नाथ हैं।
अतिशय/दिव्यता का बोध: जैन शास्त्रों के अनुसार, जब किसी आत्मा को पूर्ण ज्ञान (केवलज्ञान) की प्राप्ति होती है, तो देवगण आकाश में रत्नों से जड़े तीन छत्रों की रचना करते हैं। यह भगवान के सर्वोच्च, वीतरागी और पूजनीय होने का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
त्रिरत्न की प्रेरणा: इसके अलावा, ये तीन छत्र जैन धर्म के मूल आधार—सम्यक् दर्शन, सम्यक् ज्ञान और सम्यक् चारित्र (त्रिरत्न)—का भी प्रतिनिधित्व करते हैं।
यह खबर आपको कैसी लगी?


खंडवा




























